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धैया में 1.03 एकड़ वन भूमि और 40 डिसमिल सरकारी जमीन से हटाया गया अवैध अतिक्रमण

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धैया में 1.03 एकड़ वन भूमि और 40 डिसमिल सरकारी जमीन से हटाया गया अवैध अतिक्रमण*शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकारी भूमि का होगा उपयोग – उपायुक्त*उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन तथा वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल के निर्देशानुसार वन भूमि व सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत मौजा धैया में आज जिला प्रशासन तथा वन प्रमंडल द्वारा संयुक्त कार्रवाई कर मौजा धैया के खाता संख्या 196, प्लॉट संख्या 67 अंतर्गत स्थित 1.03 एकड़ वन भूमि तथा 40 डिसमिल सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।कार्रवाई के दौरान धनबाद अंचल के अंचल अधिकारी सह प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट श्री रामप्रवेश कुमार, अमीन मेघलाल महतो, वन प्रमंडल कार्यालय के अधिकारी व कर्मी तथा पर्याप्त संख्या में पुलिस बल उपस्थित रहे। नगर निगम से मंगाई गई 2 जेसीबी मशीनों की सहायता से अवैध रूप से किए गए निर्माणों और चहारदीवारी को ध्वस्त किया गया।उक्त वन भूमि पर दिलीप राम नामक व्यक्ति द्वारा लगभग 10 वर्षों से अवैध रूप से कब्जा जमाया गया था और उसमें से कुछ भूमि को अवैध तरीके से बेचने की भी बात सामने आई थी। अभियान के दौरान मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में वहां रह रहे परिवारों व बच्चों के आश्रय स्थल (दो आवासों) को दो दिनों की मोहलत दी गई है। संबंधित पक्षों से दो दिनों के भीतर स्वतः स्थल खाली करने का लिखित आश्वासन लिया गया है, जिसके उपरांत शेष निर्माण पर भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।वहीं इस कार्रवाई के बाद उपायुक्त ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और जमीन के अभाव को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार के निर्देशानुसार, जिला प्रशासन ने नागरिक सुविधाओं के विस्तार हेतु एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। शहरी क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी भूमि को सुरक्षित और सुव्यवस्थित कर आम जनता से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं जैसे पार्क, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र व अस्पतालों के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार पर उपयोग में लाने का निर्णय लिया गया है।प्रशासन द्वारा शहरी अंचलों में उपलब्ध सरकारी जमीनों का स्थलीय निरीक्षण और सर्वेक्षण कराया जा रहा है, ताकि जमीन की वास्तविक स्थिति और उपलब्धता के अनुरूप विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं की रूपरेखा तय की जा सके। भूमि के बढ़ते अभाव के बीच यह कदम सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगा।उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार की मंशा शहरी क्षेत्रों में समग्र विकास को गति देना है। इसी क्रम में आमजनों के हित को सर्वोपरि रखते हुए भविष्य में कई अन्य जनोपयोगी व महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी की जा रही है, जिससे बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा, महिलाओं व शिशुओं के लिए पोषण केंद्र, बुजुर्गों व परिवारों के लिए हरित पार्क तथा सभी वर्गों के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराई जा सकें।जिला प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि सरकारी अथवा वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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