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श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई कोजागरी लक्खी पूजा, सुख-समृद्धि की कामना

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श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई कोजागरी लक्खी पूजा, सुख-समृद्धि की कामनाधनबाद: शरद पूर्णिमा के अवसर पर धनबाद में बंगाली समुदाय ने कोजागरी लक्खी पूजा श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाई। घरों से लेकर मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों तक मां लक्खी की पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।बंगाली समुदाय में कोजागरी लक्खी पूजा का विशेष महत्व है। दुर्गा पूजा के समापन के बाद शरद पूर्णिमा की रात मनाए जाने वाले इस पर्व का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। शहर के विभिन्न इलाकों में घरों और पूजा स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। कई स्थानों पर मां लक्खी की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की गई। शंख ध्वनि, मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय हो उठा।पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर मां की आराधना की। घरों के आंगन में रंगोली और अल्पना बनाई गई। मां लक्खी को नाड़ू, मुरकी, खीर, फल-फूल और अन्य पारंपरिक पकवानों का भोग अर्पित किया गया। पूजा के बाद परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बीच प्रसाद वितरित किया गया।सुख-शांति और समृद्धि के लिए होती है पूजाज्ञान मुखर्जी रोड स्थित संपास मेकओवर की संचालिका संपा चटर्जी ने बताया कि कोजागरी लक्खी पूजा सुख, शांति और समृद्धि की कामना के लिए की जाती है। उनके यहां हर वर्ष पूरे उत्साह के साथ पूजा का आयोजन होता है। इस अवसर पर मित्र, पड़ोसी और रिश्तेदार एकत्रित होते हैं तथा मां को भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।त्रोई कुमारी ने बताया कि बंगाली समाज में कोजागरी लक्खी पूजा को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इन मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार लोग पूरे श्रद्धाभाव से मां लक्खी की पूजा करते हैं।वहीं, हीरापुर निवासी अमीषा रॉय ने बताया कि दुर्गा पूजा के बाद बंगाली समुदाय को कोजागरी लक्खी पूजा का विशेष इंतजार रहता है। इस अवसर पर घरों में पारंपरिक बंगाली मिष्ठान, खासकर नाड़ू और मुरकी तैयार किए जाते हैं। मां को भोग अर्पित करने के बाद सभी लोग मिलकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। उन्होंने कहा कि मां लक्खी से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर उन्नति की प्रार्थना की जाती है।आस्था के साथ संस्कृति और एकता का प्रतीककोजागरी लक्खी पूजा बंगाली समाज के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से लोग अपनी परंपराओं को जीवंत रखते हुए आपसी प्रेम और सद्भाव का संदेश देते हैं। धनबाद में बंगाली समुदाय ने पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मां लक्खी की आराधना कर पर्व मनाया।

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