करम महोत्सव में दिखी झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा- प्रकृति और परंपरा से जुड़ने का पर्व है करमरांची : रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के अखड़ा में आयोजित करम महोत्सव में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस दौरान अखड़ा परिसर में पारंपरिक गीत-संगीत, लोकनृत्य और जनजातीय संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली।मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि करम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा, संस्कृति और सामुदायिक जीवन-दर्शन से जुड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन-पद्धति आज के दौर में भी बेहद प्रासंगिक है।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में देखने के बजाय उसके ज्ञान, अनुभव और जीवन-दृष्टि को समझने की जरूरत है। उन्होंने आदिवासी भाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक ज्ञान और अखड़ा जैसी सामुदायिक संस्थाओं के संरक्षण पर जोर दिया।कृषि मंत्री ने कहा कि करम पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, संस्कृति और सामुदायिक पहचान से जोड़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों तक झारखंड की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रांची : करम महोत्सव में दिखी झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा- प्रकृति और परंपरा से जुड़ने का पर्व है करम











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