ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर निरसा विधायक का हल्लाबोल, तीन दिनों से अनशन पर बैठे; जनप्रतिनिधियों ने दिया समर्थनशहरों में 15-20 वर्षों से जमे शिक्षकों को ग्रामीण स्कूलों में भेजने की मांग, जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति की बैठक बुलाने के लिए प्रशासन पर बनाया दबाव#धनबाद : धनबाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की भारी कमी को लेकर निरसा विधायक ने जिला मुख्यालय में मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीण स्कूलों की स्थिति में सुधार और शिक्षकों की न्यायसंगत तैनाती की मांग को लेकर विधायक पिछले तीन दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। उनके आंदोलन को अब अन्य जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा है। आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।संवाददाताओं से बातचीत में विधायक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की संख्या अधिक होने के बावजूद स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में शिक्षक शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में किसी शिक्षक की तैनाती पांच वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन जिले में कई शिक्षक 15 से 20 वर्षों से शहरों में ही जमे हुए हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि ग्रामीण और शहरी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात की समीक्षा की जाए। शिक्षकों की नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति पारदर्शी तरीके से हो, ताकि ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर की जा सके। लंबे समय से शहरी क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के मामलों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें जरूरत के अनुसार ग्रामीण स्कूलों में भेजने की भी मांग उठाई गई।नेताओं ने कहा कि जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति की बैठक लंबे समय से नहीं हुई है। इसके कारण शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण समस्याएं लंबित हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से अविलंब समिति की बैठक बुलाकर शिक्षकों की तैनाती और ग्रामीण स्कूलों की बदहाली का स्थायी समाधान निकालने की मांग की।आंदोलनकारियों का कहना है कि इस गंभीर मुद्दे का समाधान केवल जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के स्तर पर संभव नहीं है। जिला उपायुक्त (DC) समेत अन्य वरीय अधिकारियों को स्वयं मामले का संज्ञान लेकर ठोस पहल करनी चाहिए। उनका आरोप है कि ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित नहीं रखा जा सकता, जबकि शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।अनशन को समर्थन देने पहुंचे जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने भी ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और ग्रामीण बच्चों के भविष्य के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षकों की न्यायसंगत तैनाती और ग्रामीण स्कूलों की स्थिति सुधारने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर निरसा विधायक का हल्लाबोल, तीन दिनों से अनशन पर बैठे; जनप्रतिनिधियों ने दिया समर्थन











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