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डुमरिया में संताली ओलचिकी ट्यूशन शुरू, बच्चों से बुजुर्गों तक ले रहे शिक्षा

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डुमरिया में संताली ओलचिकी ट्यूशन शुरू, बच्चों से बुजुर्गों तक ले रहे शिक्षादेवघर: पालोजोरी प्रखंड अंतर्गत डुमरिया गांव में आतु मोड़े होड़ (गांव का संचालन करने वाले) के सहयोग से संताली भाषा एवं ओलचिकी लिपि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संताली ओलचिकी ट्यूशन की शुरुआत की गई है। ट्यूशन का संचालन करीब एक माह से गांव के जय प्रकाश मुर्मू के घर में किया जा रहा है।ग्रामीणों के अनुसार, अपनी भाषा और लिपि को सीखने तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई है। संताली भाषा, ओलचिकी लिपि और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संचालित इस ट्यूशन में उम्र की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। बच्चे, युवा, महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग सभी इसमें शामिल होकर संताली ओलचिकी सीख सकते हैं।वर्तमान में करीब 25 छात्र-छात्राएं एवं ग्रामीण नियमित रूप से ट्यूशन में शामिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यहां ओलचिकी की शिक्षा नि:शुल्क दी जा रही है। डुमरिया के अलावा आसपास के गांवों के छात्र-छात्राएं और ग्रामीण भी इसमें शामिल हो सकते हैं।संताली ओलचिकी की कक्षाएं सप्ताह में दो दिन बुधवार और रविवार को सुबह आयोजित की जाती हैं। ओलचिकी शिक्षक संजय टुडू विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को संताली भाषा और ओलचिकी सांताली की प्रारंभिक जानकारी दे रहे हैं।ग्रामीणों ने कहा कि एक भाषा-एक लिपि की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संताली ओलचिकी ट्यूशन शुरू किया गया है। उनका कहना है कि झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल में संताली भाषा की पढ़ाई ओलचिकी माध्यम से किए जाने का उदाहरण मौजूद है। ग्रामीणों का मानना है कि संताली भाषा के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लिपियों के इस्तेमाल से भाषा और साहित्य के आपसी जुड़ाव में चुनौती आ सकती है तथा एक क्षेत्र के संताली सामग्री दूसरे क्षेत्र के संताली सामग्री को लोगो को पढ़ना कठिन हो सकता है।ग्रामीणों ने कहा कि ओलचिकी लिपि वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित लिपि है तथा इसका अपना यूनिकोड मानक भी उपलब्ध है। इससे ओलचिकी में डिजिटल माध्यमों पर संताली भाषा के लेखन, प्रकाशन और प्रसार को सुविधा मिली है। ओलचिकी लिपि के रचयिता पंडित रघुनाथ मुर्मू हैं। इसलिए संताली भाषा के अध्ययन, लेखन और साहित्य के विकास के लिए ओलचिकी के प्रचार-प्रसार बहुत महत्वपूर्ण है।इसी क्रम में छात्र-छात्राओं एवं ग्रामीणों को ओलचिकी सीखने में सहयोग के लिए पुस्तक एवं कैलेंडर का वितरण किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह की पहल से बच्चों और नई पीढ़ी को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति से जोड़ने में मदद मिलेगी।इस मौके में नरसिंह मरांडी,सुशिल मरांडी,हरीश टुडू,मनोज मुर्मू,जयदेव मरांडी,सावन टुडू,बजंती मुर्मू,अन्नू मुर्मू,पूजा मुर्मू,फूलकुमारी मुर्मू,अन्नू मरांडी,रितिका मुर्मू,विनीति मुर्मू आदि उपास्थित थे.

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