उत्सव में मातम: धनबाद के कैनवास ने उठाया पूजा पंडालों की सुरक्षा पर सवालधनबाद : कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ और 19 लोगों की दर्दनाक मौत महज एक हादसा नहीं, बल्कि भीड़ प्रबंधन और हमारी प्रशासनिक तैयारियों की विफलता पर एक बड़ा सवालिया निशान है। इसी ज्वलंत मुद्दे को धनबाद के चित्रकार राजेश ठाकुर ने एक बिल्कुल अलग और मार्मिक नजरिए से समाज के सामने रखा है। उन्होंने अपनी तूलिका को सिर्फ शोक का नहीं, बल्कि ‘सिस्टम’ को जगाने का हथियार बनाया है।रणधीर वर्मा चौक पर शुरू होकर हीरापुर चिल्ड्रन पार्क स्थित बंगाली वेलफेयर सोसाइटी के पंडाल तक पूरी हुई उनकी पेंटिंग में मां दुर्गा का चेहरा उदास है। पश्चिम बंगाल के नक्शे के साथ उकेरी गई यह उदासी सिर्फ मृतकों को श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि उत्सव के आयोजकों और प्रशासन को एक मूक चेतावनी भी है। राजेश ठाकुर इस कलाकृति के जरिए स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि आपात स्थिति में केवल घबराहट मौतों का आंकड़ा बढ़ाती है; धैर्य और सही निकासी योजना ही असल रक्षक हैं।बंगाली वेलफेयर सोसाइटी के सचिव गोपाल भट्टाचार्य के अनुसार, यह चित्र केवल भावनाओं का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि एक सामाजिक अलार्म है। मां दुर्गा की उदास आंखें मानो आयोजकों से पूछ रही हैं कि क्या उनके बच्चे इन भव्य पंडालों में वास्तव में सुरक्षित हैं?यह पेंटिंग यह तय करती है कि अब समय केवल भव्यता और सजावट पर खर्च करने का नहीं, बल्कि सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन रास्तों की पुख्ता व्यवस्था करने का है। जश्न के शोर में सुरक्षा की खामोश चीख को अनसुना करना कितना भारी पड़ सकता है, यह कलाकृति उसी का जीवंत प्रमाण है।
उत्सव में मातम: धनबाद के कैनवास ने उठाया पूजा पंडालों की सुरक्षा पर सवाल












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