नाबार्ड द्वारा उत्सव आधारित हस्तशिल्प प्रशिक्षण का शुभारंभ60 ग्रामीण महिलाओं को दिया जाएगा 15 दिवसीय प्रशिक्षणदुमका। नाबार्ड के वित्तीय समावेशन निधि के अंतर्गत प्रायोजित एलईडीपी परियोजना का शुभारंभ दुमका स्थित के वी वाटिका में दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का क्रियान्वयन श्रेया संस्था द्वारा किया जा रहा है।पइस 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में दुमका प्रखंड की 60 ग्रामीण महिलाओं को दो बैचों में उत्सव आधारित हस्तशिल्प उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए ऐसे हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनकी स्थानीय एवं निकटवर्ती बाजारों में मांग हो तथा जिनसे महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकें।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक शुभेंदु बेहरा ने कहा कि नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की आजीविका को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में त्योहारों का मौसम है और महिलाओं को बाजार की मांग के अनुरूप उपयोगी एवं आकर्षक उत्पाद तैयार करने चाहिए। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से 15 दिनों तक समयबद्ध एवं गंभीरता से प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया, ताकि प्रशिक्षण के बाद वे इसे आजीविका एवं उद्यम के रूप में आगे बढ़ा सकें।जी एम -डी आई सीदास एक्का ने कहा कि दुमका में हस्तशिल्प के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। छोटे-छोटे उपयोगी उत्पादों को बाजार तक पहुंचाकर महिलाएं अच्छी आय अर्जित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि जिला उद्योग केंद्र महिलाओं के साथ खड़ा है और प्रशिक्षण के बाद उन्हें उद्यम रजिस्ट्रेशन कराने में सहयोग दिया जाएगा। साथ ही विभिन्न मेलों एवं एम्पोरियम में उत्पादों की बिक्री के अवसर उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया जाएगा, जिससे बाजार की समस्या को कम किया जा सके। एल डी एम चंदन कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद यदि महिलाएं अपने उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए बैंक ऋण लेना चाहती हैं तो बैंक की ओर से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने महिलाओं से अपने व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का आग्रह किया। इन्डियण बैंक के शाखा प्रबंधक ने कहा कि बैंक भी चाहता है कि ग्रामीण महिलाओं को उनके उद्यम के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध हो। इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों को सही एवं व्यवस्थित रखना महत्वपूर्ण है, ताकि ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया सुगम हो सके।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी एवं पूर्व ए वी पी,एक्सिस बैंक मणि केशरी ने कहा कि त्योहारों के दौरान बाजार में बिकने वाले अनेक उत्पाद बाहर के राज्यों, विशेषकर बंगाल से आते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय महिलाएं भी यदि बाजार की मांग, उत्पाद की गुणवत्ता, लागत और बिक्री की समझ विकसित करें तो वे अपने क्षेत्र में सफल उद्यम स्थापित कर सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रशिक्षण प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को आगे आकर अपना व्यवसाय स्थापित करना होगा। लिटिल स्टेप्स पब्लिक स्कूल निदेशक माधव पंडित ने महिलाओं से अपने परिवार और बच्चों के भविष्य को मजबूत करने के लिए आर्थिक गतिविधियों में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ रही है और परिवार की आय बढ़ाने में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं से गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने तथा लागत और कीमत का संतुलन बनाए रखने की अपील की।कार्यक्रम का संचालन करते हुए जनमत शोध संस्थान के सचिव अशोक सिंह ने कहा कि दुमका की महिलाएं प्रतिभाशाली एवं उद्यमशील हैं। उन्होंने कहा कि सरकार, बैंक, नाबार्ड एवं संस्थाएं अपना सहयोग दे रही हैं, लेकिन कार्यक्रम की वास्तविक सफलता तभी होगी जब प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं आगे बढ़कर अपना उद्यम स्थापित करें और उसे सफल बनाएं।कार्यक्रम का परिचय देते हुए श्रेया संस्था के निदेशक अमित सिंह ने बताया कि कार्यक्रम का परिचय देते हुए श्रेया संस्था के निदेशक अमित सिंह ने बताया कि 15 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को तोरण द्वार, लटकन, सजावटी दीये, विभिन्न सजावटी सामग्री, अबीर, सजावटी मोमबत्तियां सहित त्योहारों में उपयोग होने वाले अन्य हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 30-30 महिलाओं के दो समूहों में कुल 60 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें स्वावलंबी उद्यमी बनाना है।यह 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें 30-30 महिलाओं के दो बैच बनाए गए हैं। दोनों बैचों का प्रशिक्षण एक साथ अलग-अलग प्रशिक्षण केंद्रों पर संचालित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को फ़ैस्टिवल लेड हैंडीक्राफ्ट के विभिन्न उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता, लागत निर्धारण, डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं बाजार की आवश्यकताओं के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के उपरांत प्रतिभागियों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य प्रशिक्षणार्थी महिलाओं को केवल प्रशिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने के लिए प्रेरित एवं सक्षम बनाना है।कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक अपरना वर्मा, नेहा अग्रवाल, सरिता कुमारी एवं अशोक कुमार, कम्युनिटी रिसोर्सेज पर्सन नीलम सूत्रधार, अनीता देवी, गायत्री देवी एवं सैफाली हेम्ब्रम, आदिकला हैंडीक्राफ्ट प्रोड्यूसर कंपनी की निदेशक बेबी देवी तथा शिल्प गुरु पायल शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग एवं प्रशिक्षणार्थी महिलाएं उपस्थित रहीं।कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रेया संस्था की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं में अपने कौशल को आजीविका एवं उद्यम में बदलने तथा स्थानीय बाजार के लिए गुणवत्तापूर्ण हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने को लेकर उत्साह देखा गया।
दुमका : नाबार्ड द्वारा उत्सव आधारित हस्तशिल्प प्रशिक्षण का शुभारंभ












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