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कानपुर नगर निगम में महापौर और नगर आयुक्त के बीच विवाद! अधिवक्ताओं को लेकर बिगड़ी बात, नगर आयुक्त बोले—“बाहरी लोगों को जवाब देने के लिए नहीं बैठा हूं”

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📍 कानपुर, उत्तर प्रदेश।

कानपुर नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में बुधवार को उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब महापौर प्रमिला पांडेय विधिक राय लेने के लिए दो अधिवक्ताओं को साथ लेकर पहुंचीं। इस पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने आपत्ति जताई और बैठक में अधिवक्ताओं के बैठने पर सवाल उठाया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ा कि नगर आयुक्त अपने अधिकारियों के साथ बैठक छोड़कर चले गए।

🔴 क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में शहर के कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी। महापौर प्रमिला पांडेय का कहना था कि विभिन्न मामलों में विधिक राय लेने के लिए उन्होंने अधिवक्ताओं को बुलाया था, क्योंकि उन्हें कई मुद्दों पर कानूनी जानकारी की आवश्यकता थी।

महापौर के साथ अधिवक्ता मो. जावेद और ऋषभ अवस्थी भी बैठक में पहुंचे थे। दोनों अधिवक्ताओं के महापौर के पास बैठने पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक में नगर निगम के अधिकारी और कार्यकारिणी के सदस्य ही बैठ सकते हैं, बाहरी लोगों को जवाब देने के लिए वह नहीं बैठे हैं।

🔴 15 मिनट में समाप्त हो गई बैठक

रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद के बाद नगर आयुक्त अपने अधिकारियों के साथ उठकर चले गए। इसके बाद बैठक समाप्त हो गई। महापौर भी अपने कक्ष में चली गईं। इस घटनाक्रम के चलते बैठक में शहर के मुद्दों पर होने वाली चर्चा प्रभावित हुई।

🔴 महापौर ने शासन तक मामला ले जाने की कही बात

बैठक के बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अब वह चुप नहीं बैठेंगी। उन्होंने कहा कि उनके पास मामले से संबंधित कागजात हैं और वह पूरे प्रकरण को शासन तक ले जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जानकारी डायरेक्टरेट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DOPT) को दी जाएगी।

🔴 बैठक में उठने थे कई अहम मुद्दे

खबर के अनुसार, कार्यकारिणी बैठक में घर-घर कूड़ा उठान के टेंडर, मंगल भवन की समितियों को निरस्त करने, हॉट मिक्स प्लांट के टेंडरों की जांच समिति भंग करने और कन्वेंशन सेंटर से होने वाली आय में नगर निगम का हिस्सा नहीं मिलने जैसे मुद्दे उठाए जाने थे। इसके अलावा नगर निगम के स्वीकृत कार्यों, निविदाओं, बजट आवंटन और खर्च का लेखा-जोखा वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का प्रस्ताव भी रखा जाना था।

अब इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के भीतर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, विवाद के दोनों पक्षों के तर्क और संबंधित नियमों की आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही पूरे मामले का निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

📢 आपकी राय: क्या नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में विधिक राय के लिए अधिवक्ताओं को बुलाने पर इस तरह का विवाद होना उचित है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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