वाराणसी। धर्म और संस्कृति की प्राचीन नगरी काशी अब आधुनिक शहरी परिवहन की दिशा में एक नया अध्याय लिखने जा रही है। वाराणसी में निर्माणाधीन अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे परियोजना के दूसरे चरण का ट्रायल रन जारी है। हाल ही में काशी विद्यापीठ और रथयात्रा-गोदौलिया रूट पर परीक्षण की गतिविधियां सामने आई हैं। इस परियोजना के शुरू होने से शहर के व्यस्त मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने और यात्रियों को एक वैकल्पिक परिवहन सुविधा देने की उम्मीद है।
3.85 किलोमीटर का कॉरिडोर, पांच स्टेशन
परियोजना के तहत कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक करीब 3.85 किलोमीटर लंबा रोपवे कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। इसमें पांच स्टेशन होंगे—
- वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन
- काशी विद्यापीठ
- रथयात्रा
- गिरजाघर
- गोदौलिया
पूरे मार्ग पर 29 टावर बनाए गए हैं। \
45 मिनट का सफर 15-16 मिनट में!
रोपवे के संचालन के बाद कैंट से गोदौलिया तक का सफर लगभग 15 से 16 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। प्रस्तावित किराया पूरे मार्ग के लिए 50 रुपये और छोटे सफर के लिए दूरी के अनुसार कम रखा गया है। इससे रेलवे स्टेशन से शहर के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान हो सकता है।
आसमान से दिखेगी बनारस की संस्कृति
रोपवे कॉरिडोर के आसपास की छतों को काशी की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है। नगर निगम की टेरेस आर्टवर्क पहल के तहत छतों पर गंगा घाट, बनारसी खानपान, हस्तशिल्प और स्थानीय विरासत से जुड़ी कलाकृतियां उकेरी जा रही हैं। यानी सफर सिर्फ परिवहन का नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति को नए अंदाज में देखने का अनुभव भी हो सकता है।
फिलहाल यात्रियों के लिए सेवा शुरू नहीं हुई है। परीक्षण और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही आम लोगों के लिए संचालन शुरू किया जाएगा। अब काशीवासियों को इंतजार है उस दिन का, जब सड़क के जाम से बचकर हवा में सफर करने का सपना हकीकत बनेगा।
#VaranasiRopeway














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